(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

Mahabharata - Drona Parva


॥ श्रीः ॥
7.56. अध्यायः 056
Mahabharata - Drona Parva - Chapter Topics
नारदेन सृञ्जयम्प्रति सुहोत्रचरित्रकीर्तनम्॥ 1 ॥


Mahabharata - Drona Parva - Chapter Text

नारद उवाच। 7-56-0x(4411)(46987)
सुहोत्रं नाम राजानं मृतं सृञ्जय शुश्रुम।
एकवीरमशक्यं तममरैरभिवीक्षितुम्॥ 7-56-1(46988)
यः प्राप्य राज्यं धर्मेण ऋत्विङ्मन्त्रिपुरोहितान्।
सम्मान्य चात्मनः श्रेयः पृष्ट्वा तेषां मते स्थितः॥ 7-56-2(46989)
प्रजानां पालनं धर्मो दानमिज्या द्विषज्जयः।
एतत्सुहोत्रो विज्ञाय धर्म्यमैच्छद्धनागमम्॥ 7-56-3(46990)
धर्मेणाराधयन्देवान्बाणैः शत्रूञ्जयंस्तथा।
सर्वाण्यपि च भूतानि स्वगुणैरन्वरञ्जयत्॥ 7-56-4(46991)
यो भुक्त्वेमां वसुमतीं म्लेच्छाटविकवर्जिताम्।
यस्मै ववर्ष पर्जन्यो हिरण्यं परिवत्सरान्॥ 7-56-5(46992)
हैरण्यास्तत्र वाहिन्यः स्वैरिण्यो व्यवहन्पुरा।
ग्राहान्कर्कटकांश्चैव मत्स्यांश्च विविधान्बहून्॥ 7-56-6(46993)
कामान्वर्षति पर्जन्यो रूप्याणि विविधानि च।
सौवर्णान्यप्रमेयाणि वाप्यश्च क्रोशसम्मिताः॥ 7-56-7(46994)
सहस्रं वामनान्कुब्जान्नक्रान्मकरकच्छपान्।
सौवर्णान्विहितान्दृष्ट्वा ततोऽस्मयत वै तदा॥ 7-56-8(46995)
तत्सुवर्णमपर्यन्तं राजर्षिः कुरुजाङ्गले।
ईजानो वितते यज्ञे ब्राह्मणेभ्यो ह्यमन्यत॥ 7-56-9(46996)
सोऽश्वमेधसहस्रेण राजसूयशतेन च।
पुण्यैः क्षत्रिययज्ञैश्च प्रभूतवरदक्षिणैः॥ 7-56-10(46997)
काम्यनैमित्तिकाजस्रैरिष्ट्वेष्टां गतिमाप्तवान्।
स चेन्ममार सृञ्जय चतुर्भद्रतरस्त्वया॥ 7-56-11(46998)
पुत्रात्पुण्यतरस्तुभ्यं मा पुत्रमनुतप्यथाः।
अयज्वानमदक्षिण्यमभि श्वैत्येत्युदाहरत्॥ ॥ 7-56-12(46999)

इति श्रीमन्महाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि षोडशराजकीये षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः॥ 56 ॥

Mahabharata - Drona Parva - Chapter Footnotes

5-56-6 हैरण्या हिरण्मयाः ग्राहादयोऽपि। वाहिन्यो नद्यः। स्वैरिण्यः सर्वजनोपभोग्याः॥ 5-56-56 षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः॥


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